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मां सती की जीभ से बना ज्वाला देवी मंदिर, प्रमुख शक्तिपीठों में से एक – GoIndiaNews


नवरात्रि 2020 में करें ज्वाला देवी मंदिर के दर्शन (pic credit: instagram/travel._ig)

नवरात्रि 2020 में करें ज्वाला देवी मंदिर के दर्शन (pic credit: instagram/travel._ig)

Durga Puja Maha Sasthi:ज्वाला देवी मंदिर (Jwaladevi Temple) में माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी. इस कारण यह मंदिर प्रमुख 9 शक्तिपीठों में शामिल है…


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 22, 2020, 4:29 PM IST

Durga Puja Maha Sasthi: शारदीय नवरात्रि (Navratri) का आज छठवां दिन है. नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है. नवरात्रि (Navratri) के पावन दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं. माता रानी उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

शक्तिपीठ
दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में ‘बृहस्पति सर्व’ नामक यज्ञ करवाया और उस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया. इस पर भगवान शंकरजी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर अपमानित महसूस किया और सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी. भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दिव्य नृत्य करने लगे. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया और माता सती पर प्रहार कर दिया. हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि जहां-जहां माता सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आया हैं. ये शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं और पूजा-अर्चना द्वारा प्रतिष्ठित हैं.

प्रमुख 9 शक्तिपीठों में से एक ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेशशक्तिपीठ वे जगह है जहां माता सती के अंग गिरे थे. शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी मंदिर में माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी. इस कारण यह मंदिर प्रमुख 9 शक्तिपीठों में शामिल है. हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा घाटी से 30 कि.मी. दक्षिण में ज्वाला देवी मंदिर स्थित है. यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहां पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है, बल्कि मंदिर के गर्भगृह से निकल रहें ज्वाला को माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता हैं. यहां पृथ्वी के गर्भ नौ ज्वालायें निकल रही हैं. ज्वाला देवी मंदिर को जोतावाली का मंदिर और नगरकोट मंदिर भी कहा जाता है. ज्वाला देवी मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवों को जाता है. नवरात्रि में इस मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहता है.

नौ ज्वालाएं
ज्वालादेवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही हैं. इन नौ ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है. नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला माता जो चांदी के दीपक के बीच स्थित है उसे महाकाली कहते हैं.

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