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हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने वालों के लिए बड़ी खबर- अब ग्रीन-रेड और ऑरेंज कलर से करें अपनी Policy की पहचान – GoIndiaNews

नई दिल्ली: इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर और बीमा कंपनियों के काम को आसान बनाने के लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण आईआरडीएआई (IRDAI) ने बड़ा फैसला लिया है. IRDAI के इस फैसले के बाद आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का ग्रीन, रेड और ऑरेन्ज कलर कोड होगा. ग्राहक इसी कलर कोड के जरिए अपनी पॉलिसी की पहचान कर पाएंगे. जल्द ही अब आप कलर देखकर पहचान सकेंगे कि आपकी पॉलिसी में क्या-क्या कवर हो रहा है और क्या-क्या नहीं…आइए आपको कलर कोडिंग के बारे में डिटेल में बताते हैं-

स्कोर के हिसाब से तय होगा कलर कोड
आपको बता दें इंश्योरेंस लेने वाले ग्राहकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए और मिससैलिंग को रोकने के लिए जल्द ही सभी लोगों की पॉलिसी को 7 मानकों के हिसाब से तय किया जाएगा. इसके बाद में ही स्कोर के मुताबिक आपकी पॉलिसी का कलर कोड तय किया जाएगा.

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>> सबसे आसान इंश्योरेंस पॉलिसी का कलर कोड ग्रीन और स्कोर शून्य (0) से 2 तक होगा.
>> ऑरेन्ज कलर कोड वाला प्रोडक्ट थोड़ा मुश्किल होगा और इस कैटेगरी के लिए स्कोर 2 से 4 तक होना होगा.
>> ग्रीन और ऑरेन्ज कलर कोड के बाद सबसे ज्यादा मिश्रता वाली कैटेगरी होगी रेड और इस के लिए स्कोर 4 से 6 तक होना जरूरी है.

स्‍कोरिंग का पैरामीटर
आपको बता दें स्कोरिंग 7 मानकों के आधार पर की जाएगी. इसमें सभी को 14.28 फीसदी का वेटेज दिया जाएगा.

1. वेटिंग पीरियड के महीनों की संख्या
वेटिंग पीरियड के हर महीने के लिए 0.15 स्‍कोर.

2. डिडक्टिबल
डिडक्टिबल के हर 1 फीसदी के लिए 0.3 स्कोर.

3. ऑप्‍शनल कवर की संख्या
सभी ऑप्‍शनल कवर के लिए 0.6 स्कोर.

4. प्रोडक्‍ट में को-पे का प्रतिशत
को-पे के 5 फीसदी से ऊपर सभी के लिए 1 फीसदी बढ़त के लिए 0.3 स्कोर.

5. सब-लिमिट्स के तहत उपचार प्रक्रियाओं/रोगों की संख्या
हर बीमारी के लिए 0.6 स्कोर, जिसकी सब-लिमिट है.

6. परमानेंट एक्‍सक्‍लूजन की संख्या
सभी परमानेंट एक्‍सक्‍लूजन के लिए 0.6 स्‍कोर.

7. नियम और शर्तों के अलावा समय और एक्‍सक्‍लूजन के लिए 0.1 स्‍कोर.

ग्राहकों को बताना होगा कलर कोड
आपको बता दें अगर आप पॉलिसी लेते हैं तो आपको कलर कोड का पता होना जरूरी है. कंपनियों को विज्ञापन के वक्त कलर कोड बताना होगा और वेबसाइट पर भी पॉलिसी की डिटेल्स के साथ स्कोर और कलर कोड बताना जरूरी होगा.

स्टार हेल्थ के MD ने दी जानकारी
स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के एमडी डॉ एस. प्रकाश कहते हैं, ”यह कदम प्रोडक्‍ट की मुश्किलों को कम करने के लिए उठाया गया है. पॉलिसी की शर्तों को न समझ पाना ग्राहकों के असंतोष और क्‍लेम खारिज होने का अक्‍सर कारण बनता है. कलर कोडिंग से प्रोडक्‍ट को चुनने में सहूलियत मिलेगी.”

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गांव और कस्बों के लोगों को मिलेगा फायदा
इस कलर कोडिंग की मदद से गांव और कस्बों में रहने वाले लोगों को मदद मिलेगी. आज भी कई इलाकों में रहने वाले लोगों को इंश्योंरेंस जैसी चीजों के बारे में कुछ जानकारी नहीं है. इसके साथ ही बीमा कंपनियों को अपने प्रोडक्‍ट को और आसान बनाने में मदद मिलेगी.

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