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चीन ने भी छोड़ा पाकिस्तान का साथ, नहीं सुधरा तो होगा ब्लैक लिस्ट | china joins india and us against pakistan in fatf | knowledge – News in Hindi – GoIndiaNews

पाकिस्तान (Pakistan) पर चीन (China) ने अपने नजरिए में बदलाव करते हुए फायनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मुद्दे पर भारत, अमेरिका और यूरोपिय देशों के पक्ष का समर्थन किया है. भारत, अमेरिका और यूरोपिय देशों ने पाकिस्तान को उसके देश में हो रही आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तान सरकार के इसे ना रोक पाने की वजह से, उसे FATF की ग्रे लिस्ट में रखे जाने का समर्थन किया है.

चीन इस मुद्दे पर अलग राय रखता था. इसके पहले चीन कहता आया है कि आतंकवाद को रोकने के लिए चीन पर्याप्त कदम उठा रहा है, इसलिए उसे इस लिस्ट से बाहर किया जाना चाहिए. लेकिन अब चीन ने भी अपना पुराना रुख छोड़ते हुए इस मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. पाकिस्तान के लिए ये बड़ा झटका है.

पाकिस्तान के ऊपर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई न करने और आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने में नाकाम रहने की वजह से पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है. इसी वजह से जून 2018 में पाकिस्तान को FATF के ग्रे लिस्ट में डाला गया था. पाकिस्तान अब भी ग्रे लिस्ट में है.

इस मुद्दे पर सऊदी अरब, मलेशिया, तुर्की और चीन पाकिस्तान का साथ दे रहे थे. इन देशों ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहा है, इसलिए इसे FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर किया जाना चाहिए. लेकिन अब इस मसले पर चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अब सिर्फ तुर्की ही एक ऐसा देश है, जो पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है.पाकिस्तान पर क्या होगा इसका असर
भारत फायनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में रखने की मांग करता रहा है. भारत का कहना है कि आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिए. हालांकि पाकिस्तान फिलहाल ग्रे लिस्ट में है. खबरों के मुताबिक पाकिस्तान फिलहाल FATF की ग्रे लिस्ट में ही रहेगा. अगर वो इस साल के जून तक आतंकवादी गतिविधि, टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए मजबूत कदम नहीं उठाता है तो पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना रहेगा. इस बारे में गुरुवार को फैसला लिया जाना है.

ग्रे लिस्ट में होने की वजह से पाकिस्तान को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. पाकिस्तान को आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य देशों से आर्थिक सहयोग और कर्ज़ मिलने में मुश्किल आएगी. साथ ही पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कई तरह की अड़चनें आएंगी. इस स्थिति में कुछ देश पाकिस्तान के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते तोड़कर उसका बहिष्कार कर सकते हैं.चीन ने क्यों छोड़ा पाकिस्तान का साथ
इस मसले पर सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान का प्रमुख साझीदार चीन ने भी उसका साथ छोड़ दिया है. पाकिस्तान के लिए ये सबसे बड़ा झटका है. दरअसल चीन अभी खुद कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है. कोरोना वायरस के फैलने के बाद चीन की स्थिति खराब हुई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को धक्का पहुंचा है.

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस पर चीन के उठाए कदम की तारीफ की है. लेकिन ये काफी नहीं है. चीन कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में नाकाम रहा है. इसका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है.

कोरोना वायरस की वजह से चीन के कई शहर लॉक डाउन हैं. चीन के कारोबार पर भी असर पड़ा है. अभी तक स्थिति सुधरती नहीं दिख रही है. ऐसे वक्त में चीन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. इसलिए उसने पाकिस्तान को लेकर अपने रवैये में परिवर्तन किया है. अगर चीन की अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित होती है तो पाकिस्तान से ज्यादा उसे भारत, अमेरिका और यूरोपिय देशों की मदद की जरूरत पड़ेगी. शायद इसलिए चीन अब टेरर फंडिंग के मसले पर पाकिस्तान को अब और समर्थन देने की हालत में नहीं है.

जून में होगा पाकिस्तान की किस्मत का फैसला
जून 2020 में फायनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का प्लेनरी सेशन होना है. फिलहाल सिर्फ तुर्की ही ऐसा देश है, जो पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर रखने का समर्थन कर रहा है. सउदी अरब, मलेशिया और चीन इसके पहले पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे. लेकिन अब इन्होंने अपने हाथ खींच लिए हैं.

पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आने में कुल 39 वोटों में से 12 वोट की जरूरत है. इसलिए ये करीब-करीब तय है कि पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा. यहां तक कि अगर पाकिस्तान में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले बढ़ते हैं तो उसे ब्लैक लिस्ट किए जाने का खतरा भी बढ़ जाएगा.

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