Breaking News
Home / India भारत / दिल्ली की हवा में बढ़ा नया जहर! अक्टूबर-नवंबर में बेहद खतरनाक स्तर पर थे PM-1 पार्टिकल्स- NASA – GoIndiaNews

दिल्ली की हवा में बढ़ा नया जहर! अक्टूबर-नवंबर में बेहद खतरनाक स्तर पर थे PM-1 पार्टिकल्स- NASA – GoIndiaNews

निखिल घानेकर
नई दिल्ली.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi-NCR) में जहरीली हुई हवा से लोगों का सांस लेना भी दूभर हो रहा है. दिल्ली पहले ही कोरोना वायरस (Delhi Coronavirus) के मामलों के बोझ से हांफ रही थी और प्रदूषण ने इसका दम और फुला दिया. पंजाब के खेत-खलिहान में पराली जलाने, स्थानीय प्रदूषण और मौसम के कारण एक बार फिर से दिल्ली-एनसीआर में सर्दी के शुरुआती महीनों में जहरीली हवा का साया मंडराता रहा. दिवाली से पहले पीएम 2.5 का स्तर कुछ दिनों में सुरक्षित सीमा से 12-15 गुना अधिक हो गया.

इस बीच उत्तर भारत में प्रदूषण को लेकर की गई नासा की स्टडी में पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों ने अक्टूबर मध्य से लेकर नवंबर के मध्य तक बेहद खतरनाक PM-1 पार्टिकल के बीच सांस ली. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दिल्ली, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं की एक टीम ने कहा कि मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर के बीच एक महीने की अवधि में, पीएम 1 का स्तर 200-300 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर (यूजी/एम 3) की सीमा में हाईलेवल पर रहा.

PM 1 पार्टिकल्स का एनालिसिस बहुत जरूरी है पीएम-1 पार्टिकल्स का एनालिसिस बहुत जरूरी है, क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी लगातार इनके कंसंट्रेशन पर निगरानी नहीं रखती. सरकारी एजेंसियां पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रदूषण की निगरानी रखती हैं. दरअसल, पीएम-1 कंसंट्रेशन के निर्धारण या सुरक्षित सीमा को परिभाषित करने वाले न तो अंतरराष्ट्रीय मानक हैं और न ही घरेलू मानक. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पास पीएम 2.5 और पीएम 10 के लिए वार्षिक औसत वायु गुणवत्ता मानक हैं, लेकिन पीएम-1 के लिए ऐसे कोई स्टैंडर्ड नही बनाए गए हैं.

PM 1 पार्टिकल्स पीएम 2.5 पार्टिकल (जो डायमीटर में 2.5 माइक्रोन या उससे कम) की तुलना में अधिक घातक हैं. ये पार्टिकल्स फेफड़ों के म्यूकस मेंब्रेन के जरिए ब्लडफ्लो में घुसते हैं. ब्लडफ्लो में घुसने के बाद  ये कण स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं और बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय  के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में कम्युनिटी मेडिसिन वि निदेशक डॉ अरुण शर्मा, प्रोफेसर ने कहा कि  ‘वायु प्रदूषण में मुख्य ध्यान PM-2.5 पर है, लेकिन आकार में 1.0 माइक्रोन या उससे कम डायमीटर के पार्टिकल्स अधिक हानिकारक हैं. वे म्यूकस बैरियर को पार कर सकते हैं और ब्लड सर्कुलेशन के जरिए शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंच सकेत हैं.’

3.73 लाख मौतें पीएम 2.5 के हाई लेवल से लगातार संपर्क में रहने से हुईं

स्टडी का हवाला देते हुए विश्लेषण में कहा गया है कि लंबे समय तक PM-1 के संपर्क में रहने से कैंसर का शिकार होने की आशंका बढ़ सकती है. दावा किया गया है कि ऐसी परिस्थिति के चलते भ्रूण के विकसित होने पर भी असर पड़ सकता है.

स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2020 के अनुसार बाहरी और घरेलू वायु प्रदूषण के लंबे समय के कारण भारत में 2019 में स्ट्रोक, हार्ट अटैक, मधुमेह, फेफड़ों के कैंसर, पुरानी फेफड़ों की बीमारियों और नवजात रोगों से 16,67,000 लोगों की मौत हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले एक दशक में 3.73 लाख मौतें पीएम 2.5 के हाई लेवल से लगातार संपर्क में रहने से हुईं.

राजधानी कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर सुरेंद्र ढाका ने कहा कि PM-1 का हाईकंसंट्रेशन भी एक समस्या है. इसके चलते प्रदूषण के बड़े पार्टिकल्स बन जाते हैं. सोलर रेडिएशन, नमी के स्तर और शांत हवाओं के कारण ये पार्टिकल्स पॉल्यूशन को और बढ़ाते हैं.

टीम के विश्लेषण से पता चला है कि दिवाली से पहले अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पीएम 2.5 का कंसंट्रेशन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में 250-500 UG/ M 3 से अधिक था. प्रोफेसर ढाका ने कहा, ‘शुरुआती घंटों में सबमाइक्रोन पार्टिकल्स ज्यादा होते हैं और यह नमी और कम तापमान प्रदूषण के चलते इसमें छोटे पार्टिकल्स भी शामिल हो जाते हैं.’

Source link

About GoIndiaNews

GoIndiaNews™ - देश की धड़कन is an Online Bilingual News Channel - गो इंडिया न्यूज़ पर पढ़ें देश-विदेश के ताज़ा हिंदी समाचार और जाने क्रिकेट, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, धर्म, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल और राजनीति की हर बड़ी खबर

Check Also

गुरुवार को होगा तरुण गोगोई का अंतिम संस्कार, असम में तीन दिन का राजकीय शोक – GoIndiaNews

गुवाहाटी. असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (Assam’s Former CM Tarun Gogoi) का अंतिम संस्कार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *