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मरीजों के इलाज में डॉक्टर की मौत, आखिरी बार दरवाजे से ली बच्चों की झलक indonesian doctor dies while treating coronavirus patients | knowledge – News in Hindi – GoIndiaNews

कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के साथ अफवाहें भी बढ़ रही हैं. इनमें से ज्यादातर अफवाहें कोरोना को लेकर ही हैं. होम क्वेरेंटाइन हो चुके लोगों के पास अक्सर इन खबरों की सच्चाई जांचने का कोई तरीका नहीं जुट रहा. ऐसी ही एक अफवाह हाल में सामने आई है, जिसमें मुंह पर मास्क लगाए एक शख्स घर के बाहरी दरवाजे पर खड़ा भीतर देख रहा है. भीतर दो बच्चे बैठे हुए हैं.

बताया जा रहा है कि ये शख्स डॉ हादिओ अली हैं. इंडोनेशिया की राजधानी जर्काता में मरीजों की देखभाल के दौरान कोरोना संक्रमित होने से इनकी जान चली गई. पुष्टि के लिए Indonesian Doctors Association (IDI) का हवाला भी दिया जा रहा है. IDI के अनुसार देश में कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान 6 डॉक्टर भी बीमारी का शिकार हुए और पूरी कोशिशों के बाद भी बचाए नहीं जा सके.

वहीं हकीकत जानने की कोशिश के दौरान पाया गया कि तस्वीर में दिख रहा शख्स डॉक्टर ही है लेकिन बिल्कुल स्वस्थ है और अब भी कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहा है. बूमलाइव की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉ की ये तस्वीर उस वक्त ली गई, जब वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने परिवार से मुलाकात कर रहे थे. बहुत ही मार्मिक ढंग से इस तस्वीर के साथ वर्णन लिखा गया, जिसमें तथाकथित तौर पर इलाज के दौरान जान गंवा चुके डॉक्टर का जिक्र था. इसके बाद ये फोटो ट्विटर पर भी वायरल हो गई.

रिकवरी की दर इतनी कम है कि खुद डॉक्टर भी खुद को संक्रमण से बचा नहीं पा रहे

फैक्ट चेक में इमेज सर्च की मदद ली गई और पता चला कि फोटो 22 मार्च से वायरल हो रही है. असल में ये मलेशिया के एक डॉ की तस्वीर है. फोटो उसके कजिन Ahmad Effendy Zailanudin ने 21 मार्च को ली थी, जब डॉक्टर अस्पताल से परिवार का हालचाल जानने लौटा था. चूंकि मरीजों के साथ रहते हुए खुद के भी वायरस से संक्रमित होने का खतरा रहता है इसलिए डॉक्टर सोशल डिस्टेंसिंग का पालनकरते हुए दूर से अपने परिवार को देख रहा था. फिलहाल मलेशिया के Selangor शहर के एक अस्पताल में काम करने वाला ये डॉक्टर स्वस्थ है और मरीजों के इलाज में जुटा हुआ है.

बता दें कि साउथईस्ट एशिया का ये देश बुरी तरह से कोरोना की चपेट में हैं, जहां अबतक कोरोना के 1,796 मामले आ चुके हैं. ये देखते हुए पीएम Muhyiddin Yassin ने 31 मार्च को खत्म होने जा रहे लॉकडाउन को 14 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है. 18 मार्च को लागू हुए इस लॉकडाउन में लोग आराम से बाहर घूम-फिर रहे थे, जिसके बाद पीएम से इसे सख्त करते हुए इसकी अवधि भी बढ़ा दी.

दूसरी ओर अगर इंडोनेशिया की ओर देखें तो वहां COVID-19 के लगभग 700 मामले रिपोर्ट हो चुके हैं. कम लगने के बावजूद ये हालात इसलिए खतरनाक माने जा रहे हैं क्योंकि लगभग 3 हफ्ते पहले ही इस देश ने खुद को पूरी तरह से virus-free बताया था. मामले आने के बाद भी कई दिनों तक कोई सरकारी एक्शन नहीं हुआ. रिकवरी की दर इतनी कम है कि अस्पताल के लोग भी खुद को संक्रमण से बचा नहीं पा रहे.

इंडोनेशिया में सिर्फ 24 मार्च को कोरोना के 107 नए मामले आए

बढ़ते केसेज को देखते हुए हफ्तेभर पहले प्रेसिडेंट Joko Widodo ने बड़े स्तर पर कोरोना की जांच के आदेश दिए. हालांकि अब भी वहां पर लॉकडाउन की घोषणा नहीं हुई है, बल्कि नागरिकों से केवल सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की गई है. इसके साथ ही प्रभावितों और मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं. यहां तक कि 27 करोड़ की आबादी वाले इस छोटे से देश को साउथईस्ट एशियाई देशों में कोरोना का केंद्र हो जाने के कयास भी लग रहे हैं.

इस बीच इंडोनेशिया में सिर्फ 24 मार्च को कोरोना के 107 नए मामले आए, जो बीते सभी दिनों में सबसे ज्यादा है. 55 मौतों के साथ ये देश पूरे साउथईस्ट एशिया में सबसे ज्यादा डेथ रेट वाला देश बना चुका है. हालांकि सरकार का कहना है कि उनके पास अपने लोगों के लिए पर्याप्त संसाधन हैं. इंडोनेशिया कोरोना की जांच के लिए चीन डेढ़ लाख टेस्ट किट मंगवा चुका है.

केवल उन्हीं की जांच हो रही है जिनमें संक्रमण के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं

हालांकि टेस्ट किट्स कितनी कम हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि केवल उन्हीं की जांच हो रही है जिनमें संक्रमण के गंभीर लक्षण हैं. वहीं हेल्थ वर्कर्स ने भी personal protective equipment (PPE) की कमी की शिकायत दर्ज करवाई है. ये हालात तब हैं जबकि World Health Organization (WHO) ने सारे देशों से कोरोना वायरस की जांच व्यवस्था दुरुस्त करने को चेताया है. WHO के डायरेक्टर Tedros Adhanom Ghebreyesus ने जिनेवा में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि हमारे पास सभी देशों के लिए एक ही संदेश है कि वे जांच पर जोर दें. इसके बिना संक्रमण फैलना रोका नहीं जा सकता है.

भारत में भी टेस्टिंग प्रोटोकॉल काफी सख्त हैं. टेस्ट रेस्ट्रिक्शन की एक वजह ये भी हो सकती है कि हमारे पास जांच की किट पर्याप्त संख्या में नहीं है. माना जा रहा है कि देश में केवल 1.5 लाख टेस्ट किट हैं. किट दूसरे देशों से आयात की जा रही थी. न्यूज18 को दिए एक इंटरव्यू में जांच लैब Thyrocare Technologies Limited ने कुछ दिनों पहले ही बताया कि बाहर से किट मंगाना काफी मुश्किल है क्योंकि ज्यादातर देशों में लॉकडाउन हो चुका है और विमान सेवाएं बंद पड़ी हैं.

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